तेज़ी से बढ़ीं हैं  रेलों में बलात्कार, छेड़खानी और बदतमीजी की घटनाएं
               
रात के ग्यारह -बारह बजे हों आप दिन भर की थकान के बाद अपनी बर्थ पर सोना चाहते हों और चंद दबंग किस्म के लोग अपने फूहडपन की हरकतों से या ऊंची आवाज़ में भद्दे गाने सुना कर शराब पीना शुरू करें,महिलाओं से बदतमीजी या अश्लील हरकत करें और टीटी या अटेंडेंट अपनी विवशता दर्शाए कि कोई पुलिसवाला नहीं तो वह अकेले क्या करे ? ट्रेन में एक भी पुलिसवाला नहीं हो तो यात्रियों की क्या दशा होती होगी, सहज अंदाजा लगाया जा सकता है !
कभी एक समय था जब ट्रेन की यात्रा सबसे सुखद और सुरक्षित मानी जाती  थी पर  ट्रेनों में देर रात में मोबाइल पर भद्दे गाने सुनना ,सिगरेट-शराब पीना और जोर-जोर से उल्टी-सीधी बात करने से लेकर अश्लील फ़िल्में तक देखने की शिकायत आम हैं , परिवारों के साथ चलने के कारण  या उलझन से बचने के लिए ऐसे सैंकडों मामले दर्ज भी नहीं कराये जाते ।
Source India times.

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